मुंबई : अगर आप अपने बहुमूल्य जीवन की सुरक्षा के लिए 15,000 रुपए सालाना खर्च करने को तैयार हैं तो जब चाहें आपको एक करोड़ की पॉलिसी मिल सकती है। एक दशक पहले इतने बड़े रकम की जीवन बीमा पॉलिसी लेने के लिए 50,000 रुपए से ज्यादा की मोटी रकम खर्च करनी पड़ती थी। मजे की बात तो यह है कि बीमा बाजार में गलाकाट प्रतिस्पर्धा के चलते प्रीमियम रेट में ज्यादा तेज गिरावट हाल के महीनों में आई है।
बीमा कंपनियों ने बिना किसी तामझाम और हो-हल्ले के 1 करोड़ रुपए और ज्यादा की टर्म पॉलिसी की प्रीमियम राशि में भारी कमी कर दी है। दशक भर पहले एलआईसी 30 साल की महिला के लिए एक करोड़ रुपए की पॉलिसी के लिए 50,000 रुपए सालाना से ज्यादा प्रीमियम लेता था। फिलहाल, निजी क्षेत्र की बीमा कंपनी बिड़ला सन लाइफ ऐसी ही बीमा पॉलिसी लगभग 15,000 रुपए सालाना के प्रीमियम पर मुहैया करा रही है।
Wednesday, July 22, 2009
Thursday, May 14, 2009
उत्तरक्षेत्र इफपा कन्वेंशन
दिनांक 28 अप्रैल को दिल्ली के सत्य सांई इन्टरनेशल सभागार में इंडियन फाईनेंशल प्रोफेशनल एसोसियेशन उत्तर क्षेत्र की ओर से एक दिवसीय सेमीनार व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । मां सरस्वती की वन्दना व दीप प्रज्ज्वलन के साथ ये भव्य समारोह आरंभ हुआ । मुख्य अतिथि श्री एच॰आर किदवई, निदेशक, भारतीय जीवन बीमा निगम ने उदघाटन किया । प्रथम सत्र में योग व मैनेजमेंट गुरू आचार्य विजय ने अपने उदबोघन में “ जीवन कैसे जीये “ इसके कुछ गुर बताये । हनुमान चालीसा में मैनेजमेंट छिपा है अनेक चौपाईया का उद्धरण देते हुये उन्होने स्पष्ट किया । मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुये श्री किदवई ने आज के बाजार की चुनौतियो में भारतीय जीवन बीमा निगम की प्रासंगिकता के महत्व को बताया । उन्होने निगम अभिकर्ता द्वारा दी जाने वाली समर्पित सेवा की भी प्रशंसा की । इसी क्रम में उन्होने वित्त वर्ष 2007-08 में इफपा द्वारा निर्धारित मापदण्डो के अनुसार गोल्ड व सिल्वर सम्मान प्राप्त करने वाले अभिकर्ताओ को मंच पर सम्मानित किया । सम्मान सम्मारोह उत्साह से परिपूर्ण था लगातार करतल ध्वनी से सभागार बार बार गूंज रहा था ।
इफपा के संस्थापक दीपक भाई ने कहा कि अब बीमा एजेंट को विदेशी सम्मान के लिये भटकने की आवश्यकता नही है । इफपा ने भारत मे ही एजेंट को सम्मान प्रदान करने का बीडा उठाया है । ‘ भोजन सत्र के बाद नटसम्राट मंच की ओर से एक नाटक “ एसा भी होता है “ की प्रस्तुति ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया । निदेशक श्याम कुमार ने बीमा अभिकर्ता के जीवन की झांकी भी इस नाटक में दिखाने का सफल प्रयास किया । नाटक प्रस्तुति के लिये सभी ने श्री सुनील डंग की प्रशंसा की ।
बीमा अभिकर्ताओ में सर्वाधिक लोक प्रिय श्री मुकेश जोशी जिनमें अभिनय करने की अदभुद क्षमता है । अपने सत्र में श्रोताओं को उर्जा से भर दिया । मुकेश जोशी ने दिल्ली में अनेक कोर्स चलाकर अभिकर्ताओ के जीवन को बदलने का अदभुद कार्य किया है । वीर चक्र विजेता कर्नल तेजेन्द्र पाल त्यागी ने अपने संक्षिप्त परन्तु देश भक्ति परिपूर्ण विचार प्रस्तुत कर सेमीनार को तिरंगा रंगो से परिपूर्ण कर दिया । वन्दे मातरम व भारत माता की जय नारों से सभागार गूंज रहा था । आई॰ओ॰ई दिल्ली के लीडर श्री अमित कोठारी ने इंटरनेशनल कान्वेंशन की जानकारी दी तथा दिल्ली में होने वाली अन्य गतिविधियों के बारे मे प्रकाश डाला । आई॰ओ॰ई दिल्ली में लोकप्रिय होता जा रहा है । अनेक दर्शकों ने आई॰ओ॰ई के काउंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाया ।
बीमा एजेंट केवल व्यवसाय ही नही करता अपितु वह समाज सेवा के प्रति भी समर्पित है श्री रोचक पुरी के संयोजन में जब श्री दीपक गुप्ता ने मन्च से नेत्र दान की अपील की तो इफपा की समस्त कार्यकारिणी ने श्री इन्द्रपाल बिन्द्रा के नेतृत्व में सबसे पहले ने्त्रदान का संकल्प फ़ार्म भरा तथा बाद में आल इंडिया मेडिकल के स्टाल पर नेत्रदान करने वालों की भारी भीड दिखाई पडी ।
इस अवसर पर इफपा की वेबसाईट का भी उदघाटन किया गया । श्री इन्द्रपाल बिन्द्रा ने वेबसाईट के विषय में जन समुदाय को विस्तृत जानकारी दी । इफपा ब आई॰ओ॰ई के सर्वाधिक लोकप्रिय अभिकर्ता दम्पती श्री पंकज अग्रवाल व श्रीमती पूजा अग्रवाल ने अपने सत्र में बताया कि किस प्रकार वे कार्पोरेट क्लब तक पहुंचे । उपरिस्थति जन समुदाय ने इन दोनों को खडे होकर तालियां बजाकर सम्मानित किया । इस सेमीनार का सफल संचालन राजेश चेतन ने श्री तपस कुमार नायक, श्री नीरज निवारी , श्री अजय पोद्दार व श्री अजय त्यागी के सहयोग से किया । दिल्ली इफपा की समस्त टीम व सी सी प्रतिभागी इस सफल आयोजन के लिये बधाई के पात्र है ।
इफपा के संस्थापक दीपक भाई ने कहा कि अब बीमा एजेंट को विदेशी सम्मान के लिये भटकने की आवश्यकता नही है । इफपा ने भारत मे ही एजेंट को सम्मान प्रदान करने का बीडा उठाया है । ‘ भोजन सत्र के बाद नटसम्राट मंच की ओर से एक नाटक “ एसा भी होता है “ की प्रस्तुति ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया । निदेशक श्याम कुमार ने बीमा अभिकर्ता के जीवन की झांकी भी इस नाटक में दिखाने का सफल प्रयास किया । नाटक प्रस्तुति के लिये सभी ने श्री सुनील डंग की प्रशंसा की ।
बीमा अभिकर्ताओ में सर्वाधिक लोक प्रिय श्री मुकेश जोशी जिनमें अभिनय करने की अदभुद क्षमता है । अपने सत्र में श्रोताओं को उर्जा से भर दिया । मुकेश जोशी ने दिल्ली में अनेक कोर्स चलाकर अभिकर्ताओ के जीवन को बदलने का अदभुद कार्य किया है । वीर चक्र विजेता कर्नल तेजेन्द्र पाल त्यागी ने अपने संक्षिप्त परन्तु देश भक्ति परिपूर्ण विचार प्रस्तुत कर सेमीनार को तिरंगा रंगो से परिपूर्ण कर दिया । वन्दे मातरम व भारत माता की जय नारों से सभागार गूंज रहा था । आई॰ओ॰ई दिल्ली के लीडर श्री अमित कोठारी ने इंटरनेशनल कान्वेंशन की जानकारी दी तथा दिल्ली में होने वाली अन्य गतिविधियों के बारे मे प्रकाश डाला । आई॰ओ॰ई दिल्ली में लोकप्रिय होता जा रहा है । अनेक दर्शकों ने आई॰ओ॰ई के काउंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाया ।
बीमा एजेंट केवल व्यवसाय ही नही करता अपितु वह समाज सेवा के प्रति भी समर्पित है श्री रोचक पुरी के संयोजन में जब श्री दीपक गुप्ता ने मन्च से नेत्र दान की अपील की तो इफपा की समस्त कार्यकारिणी ने श्री इन्द्रपाल बिन्द्रा के नेतृत्व में सबसे पहले ने्त्रदान का संकल्प फ़ार्म भरा तथा बाद में आल इंडिया मेडिकल के स्टाल पर नेत्रदान करने वालों की भारी भीड दिखाई पडी ।
इस अवसर पर इफपा की वेबसाईट का भी उदघाटन किया गया । श्री इन्द्रपाल बिन्द्रा ने वेबसाईट के विषय में जन समुदाय को विस्तृत जानकारी दी । इफपा ब आई॰ओ॰ई के सर्वाधिक लोकप्रिय अभिकर्ता दम्पती श्री पंकज अग्रवाल व श्रीमती पूजा अग्रवाल ने अपने सत्र में बताया कि किस प्रकार वे कार्पोरेट क्लब तक पहुंचे । उपरिस्थति जन समुदाय ने इन दोनों को खडे होकर तालियां बजाकर सम्मानित किया । इस सेमीनार का सफल संचालन राजेश चेतन ने श्री तपस कुमार नायक, श्री नीरज निवारी , श्री अजय पोद्दार व श्री अजय त्यागी के सहयोग से किया । दिल्ली इफपा की समस्त टीम व सी सी प्रतिभागी इस सफल आयोजन के लिये बधाई के पात्र है ।
Thursday, April 16, 2009
Tuesday, March 18, 2008
Tuesday, February 26, 2008
Monday, February 4, 2008
स्वास्थ्य बीमा कारोबार में भी उतरा एलआईसी


एजेंसी Sunday, February 03, 2008
नागपुर. भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ‘हेल्थ प्लस’ स्कीम के साथ 4 फरवरी सोमवार से स्वास्थ्य बीमा के कारोबार में भी उतरने जा रहा है। यह योजना ग्रामीण व शहरी इलाकों में एक साथ उपलब्ध होगी। एलआईसी के सीनियर डिवीजनल मैनेजर पार्थ सामल ने यहां शनिवार को पत्रकारों को बताया कि इस योजना में एक पॉलिसी के तहत पूरे परिवार (पति, पत्नी और बच्चों) को स्वास्थ्य लाभ की सुविधा दी जाएगी।
इस पॉलिसी के तहत अस्पताल के दैनिक नकद लाभ (एचसीबी), आईसीयू खर्च, बड़े सर्जिकल खर्च और घरेलू चिकित्सकीय खर्च (डोमिसिलियरी ट्रीटमेंट) के लाभ मिल सकेंगे। सामल ने बताया कि एक व्यक्ति अपने परिवार के लिए सालाना 15 हजार रुपए प्रीमियम अदा कर प्रति सदस्य 5 लाख रुपए तक सर्जिकल लाभ के साथ अधिकतम 2,500 रुपए प्रतिदिन तक के अस्पताल खर्च का नकद लाभ भी प्राप्त कर सकता है।
इसमें आयकर अधिनियम की धारा 80डी के तहत कर छूट का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने बताया कि पॉलिसी अवधि के दौरान ये लाभ परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए साल के पूरे ३६५ दिन प्राप्त होंगे। घरेलू चिकित्सकीय खर्च का लाभ साल में दो बार लिया जा सकता है। इस पॉलिसी में तीन वर्ष के बाद धन निकालने की सुविधा भी है।यूनिट लिंक्ड उत्पाद : सामल ने बताया कि यह एक यूनिट लिंक्ड उत्पाद है, इसलिए सरप्लस फंड का शेयर बाजार में निवेश किया जा सकता है। एलआईसी के नागपुर डिवीजन ने अगले दो माह में ऐसी दो लाख पॉलिसियां बेचने का लक्ष्य तय किया है।
हेल्थ प्लस बीमा की खास बातें:
* १८ से ५५ वर्ष तक की उम्र वाले यह पॉलिसी ले सकेंगे। परिपक्वता पर व्यक्ति की अधिकतम आयु ६५ वर्ष होगी।
* 3 माह से १७ वर्ष तक के बच्चों का भी इस पॉलिसी के तहत बीमा किया जा सकेगा, लेकिन अधिकतम आयु पूर्ण कर लेने वाले बच्चे को इस पॉलिसी के लाभ मिलना बंद हो जाएंगे।
* आश्रित माता-पिता को इस पॉलिसी के तहत बीमा कवर नहीं मिल सकेगा।
* पॉलिसी के तहत डेथ कवर नहीं मिलेगा।
Monday, January 28, 2008
बचत की तैयारी के साथ साल की शुरुआत

28 Jan 2008, 1718 hrs IST , नवभारत टाइम्स
फाइनेंशल ईयर के अंत में लोग टैक्स बचाने के लिए काफी परेशान रहते हैं। तब उन्हें अपनी सेविंग्स और इंश्योरेंस वगैरह की याद आती है। अगर पूरे साल फाइनेंशल प्लानिंग पर ध्यान दिया जाए, तो इस परेशानी से बचा जा सकता है।
साल की शुरुआत में हर कोई नए रिजोल्यूशंस लेता है। ऐसे में अगर साल का नया सफर फाइनेंशल प्लानिंग के साथ शुरू किया जाए, तो इससे बढ़िया बात और क्या हो सकती है? कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसा करने से टैक्स रिटर्न फाइल करने की तमाम परेशानियों से बचा जा सकता है, यानी तमाम सेविंग सर्टिफिकेट्स को अचानक अरेंज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
फाइनेंशल प्लानिंग की जल्द शुरुआत, युवा प्रोफेशनल्स इस मंत्र को समझने लगे हैं। यही वजह है कि अब वे जनवरी से ही पूरे साल की अपनी बचत के बारे में सोच लेते हैं। दूसरे शब्दों में कहें, तो वे सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) को फॉलो करने लगते हैं। सेल्स प्रोफेशनल रंजना वर्मा कहती हैं, 'मैं पूरे साल मार्केट में इनवेस्टमेंट के बेस्ट ऑप्शंस पर निगाह रखती हूं। मैंने इनवेस्टमेंट के लिए अपना बजट भी तय कर रखा है। मेरी सारी बचत एसआईपी, म्यूचुअल फंड और शेयर्स में बंटी रहती है।' एचआर प्रफेशनल रितु देसाई बताती हैं, 'मेरे पिता और मैं अपने पिछले साल की फाइनेंशल प्लानिंग को देखते हैं कि हमें किस इनवेस्टमेंट से कितना रिटर्न मिला? लेटेस्ट मार्केट ट्रेंड की जानकारी रखने के लिए मैं फाइनेंशल मैग्जीन भी पढ़ती रहती हूं।' डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर रुतुराज मिस्त्री बताते हैं कि उनका सारा इनवेस्टमेंट प्रोजेक्ट बेस्ड होता है, यानी वे स्कीम देखकर ही अपनी फाइनेंशल प्लानिंग करते हैं। उनका कहना है, 'मुझे सैलरीड पर्सन की तरह महीने में फिक्स इनकम नहीं होती, इसलिए मैं स्कीम्स देखकर ही उसमें इनवेस्ट करने या नहीं करने का फैसला करता हूं। इस साल मेरा लक्ष्य म्युचुअल फंड्स के बारे में और जानकारी हासिल करना है।' फोटोग्राफर भावेश व्यास पूरे साल के लिए अपने इनवेस्टमेंट की प्लानिंग कर चुके हैं। वह कहते हैं, 'मुझे हर महीने सैलरी नहीं मिलती, इसके बावजूद मेरे कंसल्टेंट ने मेरे लिए फाइनेंशल प्लानिंग तैयार कर दी है। जैसे ही मुझे अपने एसाइनमेंट्स का पैसा मिलेगा, मैं इस प्लानिंग के अनुसार इनवेस्टमेंट कर दूंगा।'
इनवेस्टमेंट प्लानर और फाइनेंशल कंसल्टेंट सचिन कालूस्कर कहते हैं, 'फाइनेंशल प्लानिंग जितनी जल्दी कर ली जाए, उतना अच्छा रहता है। ऐसा करने से आप टैक्स प्लानिंग बेहतर तरीके से कर सकते हैं और फाइनेंशल ईयर के अंत में किसी हड़बड़ी से आसानी से बच सकते हैं। जो लोग साल की शुरुआत से ही इनवेस्टमेंट करने लगते हैं, वे अक्सर अपने गोल आसानी से पूरे कर पाते हैं, जैसे: कार, टीवी और घर जैसी महंगी चीजों को समय रहते खरीद लेना। अगर आपके पास इनवेस्टमेंट प्लान तैयार है, तो आप स्मार्ट तरीके से सेविंग कर सकते हैं। इस तरह आप ज्यादा से ज्यादा रिटर्न का फायदा भी ले सकेंगे।' सचिन का मानना है कि फाइनेंशल ईयर के अंत, यानी मार्च में ही सेविंग करने वाले लोगों की तादाद इतनी आसानी से कम नहीं होगी। इसके बावजूद आज के युवा समय रहते सेविंग करने के बारे में सोचने लगे हैं। इसका कारण बताते हुए वह कहते हैं, 'वे जानते हैं कि साल में दो बार छुट्टियों का मजा लेने के लिए या फिर बड़े ख्वाब पूरे करने के लिए फाइनेंशल प्लानिंग करना जरूरी है। इससे भले ही उनकी सैलरी हर साल न बढ़े, लेकिन उनके रिटर्न जरूर बढ़ जाएंगे।'
तो फिर, आपने अभी तक अपना फाइनेंस प्लान तैयार किया या नहीं!
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