Monday, January 28, 2008

बचत की तैयारी के साथ साल की शुरुआत


28 Jan 2008, 1718 hrs IST , नवभारत टाइम्स

फाइनेंशल ईयर के अंत में लोग टैक्स बचाने के लिए काफी परेशान रहते हैं। तब उन्हें अपनी सेविंग्स और इंश्योरेंस वगैरह की याद आती है। अगर पूरे साल फाइनेंशल प्लानिंग पर ध्यान दिया जाए, तो इस परेशानी से बचा जा सकता है।

साल की शुरुआत में हर कोई नए रिजोल्यूशंस लेता है। ऐसे में अगर साल का नया सफर फाइनेंशल प्लानिंग के साथ शुरू किया जाए, तो इससे बढ़िया बात और क्या हो सकती है? कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसा करने से टैक्स रिटर्न फाइल करने की तमाम परेशानियों से बचा जा सकता है, यानी तमाम सेविंग सर्टिफिकेट्स को अचानक अरेंज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

फाइनेंशल प्लानिंग की जल्द शुरुआत, युवा प्रोफेशनल्स इस मंत्र को समझने लगे हैं। यही वजह है कि अब वे जनवरी से ही पूरे साल की अपनी बचत के बारे में सोच लेते हैं। दूसरे शब्दों में कहें, तो वे सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) को फॉलो करने लगते हैं। सेल्स प्रोफेशनल रंजना वर्मा कहती हैं, 'मैं पूरे साल मार्केट में इनवेस्टमेंट के बेस्ट ऑप्शंस पर निगाह रखती हूं। मैंने इनवेस्टमेंट के लिए अपना बजट भी तय कर रखा है। मेरी सारी बचत एसआईपी, म्यूचुअल फंड और शेयर्स में बंटी रहती है।' एचआर प्रफेशनल रितु देसाई बताती हैं, 'मेरे पिता और मैं अपने पिछले साल की फाइनेंशल प्लानिंग को देखते हैं कि हमें किस इनवेस्टमेंट से कितना रिटर्न मिला? लेटेस्ट मार्केट ट्रेंड की जानकारी रखने के लिए मैं फाइनेंशल मैग्जीन भी पढ़ती रहती हूं।' डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर रुतुराज मिस्त्री बताते हैं कि उनका सारा इनवेस्टमेंट प्रोजेक्ट बेस्ड होता है, यानी वे स्कीम देखकर ही अपनी फाइनेंशल प्लानिंग करते हैं। उनका कहना है, 'मुझे सैलरीड पर्सन की तरह महीने में फिक्स इनकम नहीं होती, इसलिए मैं स्कीम्स देखकर ही उसमें इनवेस्ट करने या नहीं करने का फैसला करता हूं। इस साल मेरा लक्ष्य म्युचुअल फंड्स के बारे में और जानकारी हासिल करना है।' फोटोग्राफर भावेश व्यास पूरे साल के लिए अपने इनवेस्टमेंट की प्लानिंग कर चुके हैं। वह कहते हैं, 'मुझे हर महीने सैलरी नहीं मिलती, इसके बावजूद मेरे कंसल्टेंट ने मेरे लिए फाइनेंशल प्लानिंग तैयार कर दी है। जैसे ही मुझे अपने एसाइनमेंट्स का पैसा मिलेगा, मैं इस प्लानिंग के अनुसार इनवेस्टमेंट कर दूंगा।'

इनवेस्टमेंट प्लानर और फाइनेंशल कंसल्टेंट सचिन कालूस्कर कहते हैं, 'फाइनेंशल प्लानिंग जितनी जल्दी कर ली जाए, उतना अच्छा रहता है। ऐसा करने से आप टैक्स प्लानिंग बेहतर तरीके से कर सकते हैं और फाइनेंशल ईयर के अंत में किसी हड़बड़ी से आसानी से बच सकते हैं। जो लोग साल की शुरुआत से ही इनवेस्टमेंट करने लगते हैं, वे अक्सर अपने गोल आसानी से पूरे कर पाते हैं, जैसे: कार, टीवी और घर जैसी महंगी चीजों को समय रहते खरीद लेना। अगर आपके पास इनवेस्टमेंट प्लान तैयार है, तो आप स्मार्ट तरीके से सेविंग कर सकते हैं। इस तरह आप ज्यादा से ज्यादा रिटर्न का फायदा भी ले सकेंगे।' सचिन का मानना है कि फाइनेंशल ईयर के अंत, यानी मार्च में ही सेविंग करने वाले लोगों की तादाद इतनी आसानी से कम नहीं होगी। इसके बावजूद आज के युवा समय रहते सेविंग करने के बारे में सोचने लगे हैं। इसका कारण बताते हुए वह कहते हैं, 'वे जानते हैं कि साल में दो बार छुट्टियों का मजा लेने के लिए या फिर बड़े ख्वाब पूरे करने के लिए फाइनेंशल प्लानिंग करना जरूरी है। इससे भले ही उनकी सैलरी हर साल न बढ़े, लेकिन उनके रिटर्न जरूर बढ़ जाएंगे।'

तो फिर, आपने अभी तक अपना फाइनेंस प्लान तैयार किया या नहीं!

इनवेस्ट करें, टैक्स बचाएं


28 Jan 2008, 1714 hrs IST , नवभारत टाइम्स

नए साल का पहला महीना आते ही दफ्तरों के नोटिस बोर्ड पर एक नोटिस चस्पा हो जाता है। यह नोटिस होता है अकाउंट विभाग का। नोटिस में कर्मचारियों को अपने निवेश का ब्योरा जमा करने की हिदायत दी जाती है ताकि उनकी तनख्वाह टैक्स कटौती से बचाई जा सके। अक्सर लोग फाइनेंशल ईयर की शुरुआत से ही निवेश शुरू कर देते हैं, ताकि टीडीएस बचाया जा सके लेकिन कई ऐसे भी होते हैं जिन्हें इसके बारे में कुछ भी पता नहीं होता। आइए, हम आपको बताते हैं टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड और दूसरी इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स के अलावा ऐसी कौन सी पारंपरिक बचत योजनाएं हैं, जिनमें तय इनकम के साथ टैक्स रियायत भी हासिल होती है।

पीपीएफ
टैक्स में छूट के लिए सबसे लोकप्रिय सेविंग योजनाओं में से एक है पीपीएफ यानी पब्लिक प्रॉविडेंट फंड। पीपीएफ में इनकम टैक्स की धारा 80 सी के तहत छूट मिलती है। पीपीएफ में जमा की जाने वाली राशि में आपको सालाना आठ फीसदी तक ब्याज मिलता है। अगर आप 15 साल तक सालाना सत्तर हजार रुपये जमा करते हैं तो आपको निवेश अवधि के आखिर में 20.52 लाख रुपये मिलेंगे, जबकि आपकी निवेश राशि 10.5 लाख ही होती है। पीपीएफ अकाउंट पोस्ट ऑफिस और सार्वजनिक बैंकों में खोला जा सकता है। पीपीएफ में जमा राशि पर लोन भी मिलता है और सात साल बाद आप इसमें से कुछ पैसे निकाल सकते हैं।

नैशनल सेविंग स्कीम
पोस्ट ऑफिस की नैशनल सेविंग स्कीम भी धारा 80 सी के तहत आपको टैक्स छूट दिलाती है, लेकिन पीपीएफ के बरक्स इसमें निवेश से जो ब्याज मिलता है, उसमें टैक्स छूट नहीं मिलती। इसमें निवेश की कोई सीमा नहीं है, लेकिन अगर आप दस हजार का नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट लेते हैं, तो 8.15 फीसदी के हिसाब से आपको पांच साल बाद 16,010 रुपये मिलेंगे। हां, दस हजार की सेविंग पर जो सालाना ब्याज बनता है, उस पर 80 सी के तहत छूट जरूर मिलती है।

बैंक बचत योजनाएं
बैंक बचत योजनाओं में से जो योजनाएं बैंक टर्म डिपॉजिट स्कीम के तहत आती हैं, सिर्फ उन्हीं में 80सी के तहत टैक्स रियायत मिलती है। कई बैंक इनमें नौ फीसदी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 9.5 फीसदी ब्याज देते हैं। इन योजनाओं में पांच साल का लॉक इन पीरियड होता है यानी अगर आप पांच साल से पहले पैसे निकालते हैं, तो आपको ब्याज दर का लाभ नहीं मिलेगा और न ही टैक्स में छूट मिलेगी। धारा 80 सी के तहत इन योजनाओं में आपको एक लाख रुपये तक की कर छूट मिल सकती है। बैंक अक्सर जनवरी में ही इन योजनाओं पर ब्याज दर की घोषणा करते हैं। लिहाजा ऐसी योजनाओं पर नजर रखें और जो बैंक सबसे ज्यादा ब्याज दे रहा है, उसकी फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं में इनवेस्ट करें।

इंश्योरेंस प्लान
इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से आपको जीवन बीमा का भी लाभ मिलता है और टैक्स भी बचता है। हालांकि ज्यादातर वित्तीय सलाहकार इंश्योरेंस योजनाओं को निवेश का बेहतरीन माध्यम नहीं मानते। उनका कहना है कि इंश्योरेंस सिर्फ किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए होना चाहिए, न कि निवेश औजार के लिए। लेकिन इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम पर आपको 80 सी के तहत कर छूट मिलती है। बीमा कंपनियों की मनी बैक पॉलिसी पर निश्चित अंतराल पर एक निश्चित राशि मिलती है। अमूमन ये बीमा राशि की छह से आठ फीसदी तक होती है और टैक्स दायरे से बाहर होती है। इनडॉमेंट पॉलिसी में भी पैसे मिलते हैं और इसमें भी टैक्स छूट होती है। पेंशन प्लान में भी आयकर छूट होती है।

होम लोन पर कर छूट
टैक्स छूट के लिए प्रॉपर्टी में निवेश सबसे लोक प्रिय साधनों में से एक है। होम लोन पर अदा किए गए मूलधन पर एक लाख रुपये और ब्याज पर डेढ़ लाख रुपये तक छूट मिल सकती है। इस तरह आप अपनी सालाना आय में ढाई लाख तक की टैक्स रियायत ले सकते हैं। फाइनेंशल एक्सपर्ट इसे टैक्स बचाने के मौजूदा विकल्पों में सबसे ऊंची रेटिंग देते हैं।

मेडिक्लेम पॉलिसी
मेडिक्लेम पॉलिसी टैक्स बचाने का अच्छा तरीका है और इसका दोहरा फायदा है। एक तो आपको अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान होने वाला खर्च नहीं देना पड़ता, दूसरे आपको टैक्स में 80डी के तहत छूट भी मिलती है। अगर आप सालाना 10,000 रुपये का प्रीमियम (सीनियर सिटिजंस के लिए 15,000 रुपये) अदा करते हैं तो आपको 3,060 रुपये तक टैक्स रियायत मिल सकती है। अगर आप ऊंची आय के कारण टैक्स अदायगी के सबसे ऊपरी दायरे में हैं, तो पत्नी, बच्चों और अपने ऊपर आश्रित अपने माता-पिता के लिए मेडिक्लेम पॉलिसी जरूर लें।

यूलिप में निवेश करें, मगर बारीकियां समझ कर


28 Jan 2008, 1714 hrs IST , नवभारत टाइम्स

शेयर मार्केट और दूसरे पूंजी बाजारों में तेजी को देखते हुई निवेशकों में यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान यानी यूलिप को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। जब आप यूलिप पॉलिसी लेते हैं, तो इसमें निवेश किए गए आपके पैसे का एक हिस्सा पूंजी बाजार में निवेश किया जाता है और दूसरे हिस्से से लाइफ कवरेज होता है। एक्सपर्ट की राय में यूलिप से बेहतर रिटर्न हासिल होते हैं, लेकिन इनका स्ट्रक्चर थोड़ा कॉम्प्लेक्स होता है। ऐसे में निवेश करने से पहले इसके हर पहलू के बारे में जान लेना बेहद जरूरी है।

यूलिप क्या है?
यूलिप यानी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान। इसमें किए गए निवेश का एक हिस्सा आपकी चुनी हुई योजना में लगाया जाता है और दूसरा हिस्सा आपका इंश्योरेंस कवर करता है। अमूमन आप इंश्योरेंस का जो भी प्रीमियम अदा करते हैं, उसका पांच-छह गुना तक की रकम का जीवन बीमा कवर किया जाता है। ज्यादातर यूलिप योजनाएं तीन साल की लॉक-इन अवधि की होती हैं।

इंश्योरेंस कवर के अलावा जो निवेश किया जाने वाला हिस्सा होता है, उसमें कई इनवेस्टमेंट ऑप्शन होते हैं। किसी में पूरा पैसा इक्विटी यानी शेयर बाजार में निवेश किया जाता है। सुरक्षित निवेश योजना के तहत इक्विटी और ऋण बाजार में निवेश का अनुपात 70 और 30 होता है, जबकि बैलेंस्ड प्लान में इनमें 50-50 का निवेश अनुपात होता है। हालांकि पॉलिसी लेने वालों को एक प्लान से दूसरे प्लान में जाने का विकल्प रहता है, लेकिन ये सीमित होते हैं।

यूलिप से जुड़े ऊपरी व्यय
अमूमन पहले साल आप जितना प्रीमियम देते हैं, उसका एक हिस्सा काटकर ही निवेश किया जाता है। मान लीजिए पहले साल आपने 50,000 रुपये का प्रीमियम भरा, तो आपकी जो राशि निवेश के लिए जमा होगी, उसका हिसाब कुछ इस तरह बनेगा।

प्रीमियम राशि- 50,000 रुपये
एंट्री लोड -5 फीसदी- 2,500 रुपये
फंड मैनेजमेंट शुल्क- 7.5 फीसदी - 3750 रुपये
एडमिनिस्ट्रेशन चार्जेज-240 रुपये
मॉर्टलिटी चार्ज- 140 रुपये
कुल लागत- 6,630 रुपये
वास्तविक निवेश राशि -50,000 -6,630 रुपये
43,370 रुपये

( इस उदाहरण में 50,000 रुपये प्रीमियम है और बीमा 2.5 लाख रुपये का है)

यूलिप की बारीकियां
चूंकि यूलिप का एक हिस्सा शेयर मार्केट या दूसरे पूंजी बाजारों में निवेश किया जाता है, इसलिए जैसे ही आपके पैसे से खरीदे गए शेयरों और यूनिटों के दाम गिरने लगते हैं, आपका रिजर्व कम होने लगता है। अब अगर इसमें इतना पैसा नहीं बचा है कि आपकी प्रीमियम राशि कवर हो सकती है, तो प्रीमियम का भुगतान नहीं होता। आपसे प्रीमियम भरने को कहा जाता है। अगर आप ऐसा नहीं कर पाते, तो आपका बीमा कवर खत्म हो सकता है। दूसरे इसमें परंपरागत इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाले छह से आठ फीसदी तक के रिटर्न की भी गारंटी नहीं होती।

एजेंट जो नहीं बताते
ज्यादातर एजेंट साल दर साल लगने वाले चार्जेज के बारे में नहीं बताते। यूलिप से आप तीन साल बाद पैसे निकाल सकते हैं। प्रीमियम का भुगतान भी आपके फंड में जमा रकम से होता रहेगा। लेकिन अगर आपके फंड में इतना पैसा नहीं है कि मॉर्टलिटी चार्ज जमा किया जा सके, तो आपका इंश्योरेंस खत्म हो सकता है। अमूमन एजेंट ग्राहकों को इसकी जानकारी नहीं देते।

मुआवजा
अगर बीमा पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो यूलिप पॉलिसी धारक को इंश्योर्ड रकम यानी सम इंश्योर्ड या यूनिटों के बढ़ने या घटने के बाद फंड में जमा कुल रकम में से जो भी ज्यादा होगा मिलेगा। यूलिप की बहुत कम ऐसी पॉलिसियां हैं, जिनमें सम इंश्योर्ड और फंड रकम दोनों का भुगतान किया जाता है। एक्सर्पट्स का कहना है कि ऐसे हालात में पारंपरिक लाइफ इंश्योरेंस, टर्म इंश्योरेंस पॉलिसियां या फिर सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश ज्यादा अच्छे विकल्प हैं।

बाजार में यूलिप प्रॉडक्ट
मार्केट में लगभग पचास तरह के यूलिप प्रॉडक्ट हैं। आप इनमें से अपनी सुविधानुसार चुनाव कर सकते हैं। हालांकि अलग-अलग यूलिप प्रॉडक्ट आपकी अलग-अलग जरूरतों को पूरा करने का दावा करते हैं लेकिन ये कमोबेश एक ही तरह के होते हैं। चाहे वे चिल्ड्रन प्लान हों या फिर बोनस वाले प्लान सभी एक जैसे होते हैं। हां, निवेशक को जो पैसा मिलता है उसके भुगतान का ढांचा अलग-अलग होता है। ऐसे प्लान में आप लॉक-इन पीरियड के बाद पैसे निकाल सकते हैं।

यूलिप पॉलिसी खरीदने से जुड़ी सावधानियां
पॉलिसी एनएवी पर न जाएं। पॉलिसी से जुड़े फंड का ट्रैक रिकॉर्ड देखें। आपका एजेंट चाहे जितना जोर डाले, पॉलिसी के बारे में पूरी जानकारी लिए या फिर ऑफर डॉक्यूमेंट की बारीकियां समझे बिना निवेश न करें। अगर आपको ऑफर नहीं जंचता, तो बेहतर है कि आप यूलिप के बदले एसआईपी के जरिये म्यूचुअल फंड में निवेश करें।

यूलिप एक नजर में
निवेश राशि - निवेश की कोई सीमा नहीं
पॉलिसी से जुड़े खर्च - कोई ऊपरी सीमा नहीं। यह खर्च इंश्योरेंस कंपनी तय करती है।

टैक्स में छूट: आयकर की धारा 80 सी का कर छूट लाभ सभी यूलिप पॉलिसी को मिलता है।

Thursday, January 24, 2008

मेडीक्लेम पालिसी के विषय में

मेडीक्लेम पालिसी क्यों ?

1) स्वास्थय ठीक रहने के विषय में अनिश्चितता रहती है।
2) अस्पताल के खर्चे लगातार बढ़ते जा रहें है।
3) बहुत कम प्रीमियम देकर आप खर्चे की चिंता बीमा कम्पनी पर छोड़ सकते हो।
4) आयकर में धारा 80 डी के अन्तर्गत 15000/- तक के प्रीमियम पर शत प्रतिशत आयकर छूट उपलब्ध है। अतः आयकर बचाने का काम भी मेडीक्लेम पालिसी करती है।

क्या कवर नहीं है:-

1) नई पालिसी आरम्भ करने के 30 दिन दुर्घटना के अलावा कुछ कवर नहीं है।
2) पालिसी आरम्भ होने से पूर्व के रोग कवर नहीं है।
3) प्रेगनेन्सी व कन्सल्टेन्सी कवर नहीं है।
4) पहले वर्ष में हरण्या, मोतिया बिन्द, फिस्ट्रला, पाईल्स, साइनस, पोस्टेटिक और इसी तरह के रोग कवर नहीं है।

फ्लोटर व नोन फ्लोटर मेडीक्लेम

1) फ्लोटर पालिसी में पूरे परिवार के लिये एक मुश्त बीमा प्रीमियम का भुगतान किया जाता है तथा एक पालिसी वर्ष में परिवार के किसी भी सदस्य के लिये उस बीमित राशी तक क्लेम उपलब्ध रहता है।
2) नोन फ्लोटर पालिसी में परिवार के हर सदस्य को उसके लिये निर्धारित बीमित राशी जिसका प्रीमियम दिया गया है उस बीमित राशी तक क्लेम उपलब्ध रहता है।

कौन ले सकता है

1) 0 से 45 वर्ष तक के सभी नागरिक बिना मेडीकल जांच के पालिसी ले सकते हैं।
2) 45 वर्ष से अधिक आयु के लिये कम्पनी के नियमानुसार मेडीकल जांच के बाद ही पालिसी उपलब्ध हैं।

औपचारिकतायें

1) बीमा प्रस्ताव पत्र
2) मेडीकल रिपोर्टस (45 वर्ष से अधिक आयु के लिये)
3) प्रत्येक सदस्य के दो पासपोर्ट साइज फोटो
4) प्रीमियम राशी चेक या नकद

विशेषतायें

1) टी पी ए आई कार्ड के माध्यम से देश के लगभग सभी बड़े अस्पतालों में केश लेस सुविधा लेकर इलाज किया जा सकता है।
2) नोन फ्लोटर मेडीक्लेम पालिसी में प्रीमियम पर परिवार के लिये 5 से 10 प्रतिशत तक डिस्काउंट मिलेगा।

क्लेम सम्बन्धी जानकारी

1) न्यूनतम 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहना आवश्यक है।
2) अस्पताल भर्ती से 30 दिन पूर्व व 60 दिन बाद के खर्चों का भुगतान पालिसी में निर्धारित सीमा तक किया जायेगा।

Cholamandalam’s Personal Accident Insurance

What does the Policy Cover?

Cholamandalam’s Personal Accident Insurance provides compensation for loss of life or injury (partial or permanent) caused by an accident. The policy is open to all age groups (6 months to 70 years) and the principal sum chosen could vary from Rs. 1 lakh to Rs. 1 crore based on the income.

The policy further provides unmatched features that are aimed to protect you and your family during and after an unfortunate calamity.

1 Weekly Benefit: The policy provides weekly compensation (1% of Principal Sum or Rs. 5000, whichever is lower, for maximum 100 weeks) to you or your family in the event that you are not in a position to earn due to a disability caused by an accident.

2 Medical Reimbursement: You or your family will be reimbursed the cost of treatment and the use of hospital facilities for treatment of your injury. The compensation under this benefit is lower than 40% of the admissible claim amount or 10% of the Principal Sum or the actual medical expenditure.

3 Education Benefit: In the unfortunate event of loss of life or permanent total disability, the policy provides compensation to your children or legal spouse to continue education. The compensation under this is 10% of Principal Sum up to a maximum of Rs. 25,000.

4 Modification of residential accommodation and own vehicle: Permanent Total Disability arising from an accident could sometimes demand a change in lifestyle. In order to meet these requirements you might have to invest or modify your existing vehicle or invest in making some changes in your house (shifting to ground floor or change in staircase). Cholamandalam shall reimburse 10% of the Principal Sum up to a maximum of Rs. 50,000 towards this.

5 Ambulance Hiring Charges (in-built cover): You will be reimbursed up to Rs. 1,000 for ambulance hiring charges in the event of an accident.

6 Transportation of mortal remains (in-built cover): The policy reimburses up to 3% of Principal Sum up to a maximum of Rs. 6,000 to the family, towards the cost of moving mortal remains from the accident site to hospital, residence or cremation grounds.

7 Broken Bones: Personal Accident Insurance from Cholamandalam is a unique policy that offers cover for fractures in the event of an accident. The Principal Sum under this can be 10% of Principal Sum under Death cover or maximum of Rs. 50,000.

8 Cremation Ceremony (in-built cover): Actual cost up to Rs. 5,000 in connection with performing of ceremonies up to the time of cremation, will be reimbursed.

What does the Policy not Cover?

1 Any existing disablement while taking the Policy for the first time
2 Death or disablement due to intentional self injury
3 Suicide
4 Death or disablement under influence of liquor or drug
5 Natural death
6 Pregnancy or child-birth
7 Venereal disease
8 Insanity
9 Breach-of-law with or without criminal intent
10 War & nuclear perils
11 In aircraft except as a passenger
12 Congenital Disease

Doctors Indemnity Policy

Brief Description :

This Policy is for the Doctors who are registered with IMA. This Policy will indemnify any act committed by the Insured who shall be a Registered Medical Practitioner, giving rise to any Legal Liability to Third Parties. The Insured includes the Policy Holder and his Qualified Assistants or employees named in the Proposal. The Act has to be commited during the period of insurance commencing from the Retroactive Date. In the normal course all claims for compensation have to be legally established in a Court of Law. Jurisdiction applicable will be Indian Courts. The limit of indemnity granted under the Policy for Any One Accident(AOA) or Any One Year(AOY) (per accident per policy year) will be identical. No Short period policies are permitted. Registered Medical Practitioners shall be classified as:
1 Physicians
2 Pathologists
3 Oncologists
4 Cardiologists
5 Psychiatrists
6 Radiologists or Roentgenologists
7 General Surgeons
8 Plastic Surgeons
9 Orthopaedic Surgeons
10 Urologists
11 Abdominal Surgeons
12 Thoracic Surgeons
13 Neuro Surgeons
14 Cardio-Vascular Surgeons
15 Otorhinolarynologists
16 Prootologists
17 Ophthalmalogic Surgeon
18 Ophthalmalogic Physician (Excluding Surgery)
19 Obstetrician and Gynaecologist
20 Physician and non-specialist Surgeon
21 Other Practitiones - describe fully

Covered Risks :

ERRORS and OMISSIONS on the part of the Medical Practioners, Physicians and Surgeons

Major Exclusions :

Criminal act, services rendered under the influence of intoxicants or narcotics, Third party Public Liability, claims under cosmetic plastic surgery, hair transplants, punch grafts, flap rotations etc.

Premium:

0.01 % of Sum Assured for Physian
0.02 % of Sum Assured for Surgen

जनश्री बीमा योजना


जयपुर,२९ दिसम्बर, २००७ राजस्थान में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा लागू की गई ’’जनश्री बीमा योजना’’ वरदान साबित हुई है। इस योजना के तहत राज्य में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के असंगठित लगभग ६० हजार श्रमिकों का बीमा किया जा चुका है।
बीमित श्रमिक की मृत्यु की दशा में श्रमिक द्वारा पूर्व नामित व्यक्ति को ३० हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। बीमित श्रमिक की दुर्घटना के कारण मृत्यु होने पर नामित व्यक्ति को ७५ हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। दुर्घटना के कारण स्थाई अपंगता होने पर बीमित को ७५ हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। दोनों आँखें अथवा दो अंगों के खराब होने की दशा में बीमित को ७५ हजार रुपये के भुगतान का प्रावधान है। एक आँख अथवा एक अंग खराब होने की दशा में बीमित को साढे ३७ हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। बीमित व्यक्ति के परिवार के कक्षा ९ से १२ के बीच अध्ययन कर रहे अधिकतम दो बच्चों की ’’शिक्षा सहयोग योजना‘‘ के तहत प्रति बच्चे को चार वर्ष तक प्रति तिमाही ३०० रुपये की छात्रवृति का लाभ भी दिया जाता है।
’’जनश्री बीमा योजना‘‘ के तहत बीमा कराने वाले श्रमिक सदस्य को प्रतिवर्ष २०० रुपये का प्रीमियम जमा कराना होता है जिसमें से १०० रुपये सामाजिक सुरक्षा कोष (केन्द्र सरकार) द्वारा वहन किये जाते हैं। अतः सदस्य द्वारा ७५ रुपये तथा २५ रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन किये जाते हैं। प्रीमियम राशि सदस्य अथवा संस्था (नोडल एजेन्सी) में से किसी के द्वारा भी वहन किया जा सकता है। यह योजना न्यूनतम २५ सदस्यों वाले समूह को उनकी संस्था अथवा संगठन (नोडल एजेन्सी) के माध्यम से ही दी जाती है। योजना अवधि एक वर्ष की होती है जिसे प्रत्येक वार्षिक नवीनीकरण तिथि पर पुनः एक वर्ष की अवधि के लिए बढाया जाता है। योजना में बिना व्यक्तिगत स्वास्थ्य जांच के, खेल अच्छे स्वास्थ्य की घोषणा के आधार पर उन व्यक्त्यिों को सम्मिलित किया जा सकता है, जिनकी उम्र न्यूनतम १८ वर्ष एवं अधिकतम ६० वर्ष के बीच हो।
’’जनश्री बीमा योजना‘‘ भारतीय जीवन बीमा निगम की एक सामूहिक सुरक्षा योजना है। इसका उद्देश्य उन ग्रामीण एवं शहरी निर्धन लोगों को सस्ती एवं रियायती दरों पर बीमा सुरक्षा प्रदान करना है जो गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। योजना का लाभ संबंधित वर्गों को पहुँचाने के लिए सरकार एवं निगम ने कुछ समूह, वर्ग चिन्हित किये हैं जो अपने संगठन अथवा संस्था के माध्यम से योजना लागू करवा सकते हैं। चिन्हित किये गये समूह, वर्ग में बीडी श्रमिक, ईंट-भट्टा श्रमिक, काष्ठकार, मोची, मछुआरे, हमाल, शिल्पकार, हाथकर्घा, बुनकर, महिला दर्जी, चर्मकार, पापड उद्योग से जुडा महिला संगठन, स्वरोजगार युक्त अपंग व्यक्ति, प्राथमिक दुग्ध उत्पादक, रिक्शा चालक, सफाई कर्मचारी, सम्मिलित हैं।
इस योजना का नमक श्रमिक, तेंदूपत्ता संग्रहकर्ता, शहरी निर्धन, वन श्रमिक, रेशम खेती श्रमिक, ताडी संग्रहण श्रमिक, बिजली चलित हाथकर्घा श्रमिक, दूरदराज ग्रामीण पहाडी क्षेत्र महिलाएं, फूडस्टफ खाण्डसारी टेक्सटाईल, लकडी उत्पादन, कागज, चमडा, छपाई, रबर व कोयला, मोमबत्ती, खिलौना उद्योग से जुडे श्रमिक भी लाभ उठा सकते हैं। योजना का लाभ कृषक, ट्रांसपोर्ट ड्राईवर्स, ट्रांसपोर्ट कर्मचारी, भवन निर्माण, पटाखा उद्योग, नारियल प्रोसेसिंग से जुडे श्रमिक, आंगनबाडी कार्यकर्ता एवं कोतवाल भी उठा सकते हैं।

JEEVAN AKSHAY

Promoter: Life Insurance Corporation of India (LIC)

Type: Immediate Annuity For Life

Some of the common questions answered

`What is an Annuity ?’

• Payment once a year against a single investment called `Corpus’

`Is the payment compulsorily once a year or is there any option to receive payment much earlier ?’

• Payment under an Annuity can be received once a year or twice a year or 4 times a year or 12 times a year with a slight variation.

`What is an Immediate Annuity ?’

• Payment of Annuity as above immediately. Thus, payment can be after 1 month from the date of investment or after 3 months or after 6 months or after 1 years.

`On what factors does the quantum of Annuity depends ?’

• Your age at which the Annuity is supposed to be received by you (called vesting age) and Annuity options you have chosen. One point to be borne in mind is that the quantum of Annuity keeps increasing with age.

`Who is an Annuitant ?’

• A person entitled to receive the Annuity installments.

`What are the various Annuity options available under Jeevan Akshay?’

• Option 1 : Annuity payment at the same rate guaranteed as long as the annuitant is alive. Nothing is payable on death. Obviously, this option carries maximum interest.

• Option 2 : Annuity payment at the same rate guaranteed for 5 years irrespective of whether the annuitant is alive or not and paid as long as the annuitant outlives 5 years. Nothing is payable on death after 5 years.

• Option 3 : Annuity payment at the same rate guaranteed for 10 years irrespective of whether the annuitant is alive or not and paid as long as the annuitant outlives 10 years. Nothing is payable on death after 10 years.

• Option 4: Annuity payment at the same rate guaranteed for 15 years irrespective of whether the annuitant is alive or not and paid as long as the annuitant outlives 15 years. Nothing is payable on death after15 years.

• Option 5: Annuity payment at the same rate guaranteed for 20 years irrespective of whether the annuitant is alive or not and paid as long as the annuitant outlives 20 years. Nothing is payable on death after20 years.

• Option 6: Annuity payment at the same rate guaranteed as long the annuitant is alive with return of `Corpus’ on death, whenever it occurs. Interest under this option is the lowest, but the additional feature of this option is that the purchase price of the annuity is available to the nominee as and when the annuitant is not alive for investment purpose.

• Option 7: Annuity payment increasing @ 3.00% per annum, simple, guaranteed for life. Nothing is payable on annuitant’s life.

• Option 8: Annuity payment at the same rate guaranteed as long as the annuitant is alive with 50% of the same guaranteed to the spouse on death of the annuitant, as and when it occurs.

• Option 9: Annuity payment at the same rate guaranteed as long as the annuitant is alive with 100% of the same guaranteed to the spouse on death of the annuitant, as and when it occurs.

`What is the effect of Income -tax on the investment made ?’

• Premium paid during currency of the policy along with other listed savings enjoys full exemption from income-tax upto Rs 1,00,000/- under section 80C of the Income-Tax Act 1961.

`What is the effect of Income -tax on the Annuity installments received under Jeevan Akshay ?’

• Annuity Installments received under Jeevan Akshay are deemed `salary’ and taxed as such.

`What is so special about Jeevan Akshay ?’

• Jeevan Akshay is an Immediate Annuity Plan. Installments are guaranteed for life. To that extent, cash problem arising at different intervals is solved once for all.

• Certain periodic compulsory financial committments can be taken care of by these annuity installments.

• As an Annuitant, you can opt for higher annuitant installments that allows you more freedom to spend in preference to return of `Corpus’ on your death.

• These annual installments can themselves pay your regular life insurance premium. Alternatively, with one single deposit under Jeevan Akshay, you can plan your regular life insurance portfolio so that your recurring premium payment will not pose any problem.

`I am an NRI investor. Can I invest on Jeevan Akshay ?’

• Yes, You can.

`How do I go about investing on Jeevan Akshay?’

• Please send an email to mail@bimahelpline.com

FORTUNE PLUS

Promoter : Life Insurance Corporation of India (LIC)

Type : Unit Linked Endowment Life Insurance Plan.

Some of the common questions answered

`How long I need to pay premium under the plan ?’

• 5 years, stopping in case of death, if it occurs earlier.

`How long the plan is valid’?

• Between 5 -20 with a condition that upper age limit for maturity does not exceed 65 years.

`What do I get under the plan, if I survive the policy term ?’

• Your fund value.

“What is the Fund value ?’

• Net Asset Value (NAV) of the Units in your account as on the day of encashment.

`What does my nominee get in case I am no more before completion of the policy term ?’

• Higher of the face value of your policy or Fund value.

`What if I meet with a fatal accident during the policy currency ?’

• Your nominee will get an additional amount equivalent to the face value of the policy not
exceeding Rs 50 Lakhs.

`Is there any provision for withdrawal during the currency of the policy?’

• Yes, Partial encashment of `units’ is allowed after third policy anniversay from the commencement.

`Can I avail some loan against the plan in case of emergency ?’

• No.

`Can I encash the policy itself instead of waiting for completion of the policy term’?

• Yes, after completion of the third policy anniversary from the commencement. Surrender value
payable will be fund value of all the units in your account as on the day of surrender.

`What is the premium payable under Fortune Plus ‘?

• Unlike other conventional life insurance plans, premium payable under Fortune plus is variable. First Year premium can be any amount exceeding Rs 20,000.

• Subsequent 4 years’ premium will be @25% of the first year premium.

• For example, if the first year premium you choose to pay is Rs 50,000/- , you need to pay only Rs 12,500/- per year for next 4 years.

`What are the various charges connected with the plan apart from the regular premium ?’

• Premium allocation charge ranging from 15 to 13.50% of the First Year Premium and 2.50% of the subsequent 4 years’ premium. This charge will not go for buying `units’ for you.

• Mortality Charge- cost of life insurance cover which is age specific, will be taken every month. Life Insurance cover is the difference between Sum Assured under Basic plan and the Fund value after deduction of all other charges.

• Accident Benefit Charge- cost of Accident Benefit Rider, will be levied every month at the rate of Re 0.50 per thousand Accident Benefit Sum Assured per policy year.

• Policy Administration Charge @ Rs. 60/- per month during the first policy year and Rs. 20/• per month thereafter, throughout the term of the policy subject to a maximum of Rs.150/- per month during the first policy year and Rs. 50/- per month thereafter.

• Fund Management Charge @ 0.75% p.a. of Unit Fund for “Bond” Fund, 1.00% p.a. of Unit Fund for “Secured” Fund, subject to a maximum of 20% P.A of Unit Fund, 1.25% p.a. of Unit Fund for “Balanced”Fund subject to a maximum of 2.5% P.A of Unit Fund and 1 .50% p.a. of Unit Fund for “Growth” Fund Bond Fund: 1.5% P.A. of Unit Fund, subject to a maximum of 3.0% p,a, of Unit Fund. Fund Management Charge shall be appropriated while computing NAV.

• Switching Charge : This is a charge levied on switching of monies from one fund to another not exceed Rs. 200/- per switch. Within a given policy year, 4 switches will be allowed free of charge. Subsequent switches in that year shall be subject to a switching charge of Rs. 100/- per switch.

• Service Tax Charge - A service tax charge shall be levied on the Mortality Charges and Accident Benefit rider charges, if any, on a monthly basis. The level of this charge will be as per the rate of Service Tax as applicable from time to time. Presently, the rate of Service Tax is 12% with an Educational cess at the rate of3% thereon and hence, effective rate is 12.36%

• Miscellaneous Charge - This is a charge levied for an alteration within the contract, such as reduction in policy term, change in premium mode, etc. An alteration may be allowed subject to a charge of Rs.50/- not exceeding Rs. 200/- per switch.
`What is the income-tax benefit under the plan ?’

• Premium paid under Fortune Plus enjoys I.T exemption upto Rs 1,00,000/- per annum along with certain other investments referred to under section 80C of the I.T Act 1961.
`Am I eligible to invest under Fortune Plus ‘?

• Yes, if you are in the age group of 12-60 years.

`Can I invest under Fortune Plus if I am staying in a foreign country ‘?

• Yes, under Mail order, provided you are a Non-Resident Indian Investor.

`How do I go about in case I want to invest under Fortune Plus ‘?

• You can write to me at mail@bimahelpline.com for application and other requirements

LIMITED PAYMENT WHOLE LIFE PLAN

Promotor : Life Insurance Corporation of India (LIC)

Type : Low Premium Permanent Life Insurance Plan.

Some of the common questions answered



`What do I get, if, I survive the policy term I have chosen ?’

• Nothing upto your age of 80 years. On completion of 80, you will receive insured amount + Bonus on the full insured amount upto your age of 80, in case you want.

‘What does my nominee get if I am no more before completion of the policy term I have chosen ‘?

• Insured amount +Bonus on the full insured amount for the period premium was paid before your death.

`How long bonus is paid under Limited Payment Whole Life Plan ?’

• Till you attain 80 years of age, if you have opted to receive your claim amont then or till you are alive, irrespective of when you have stopped payment of premium.`Is there any provision for funds in between to meet unforeseen contingencies ?’ • No such provision, except borrowal against the Surrender Value after 3 years’ premia have been paid at 9.00% per annum simple interest.

How long I need to pay premium under Limited Payment Whole Life Plan ?’

• Completion of the policy term chosen or death, should it occur earlier.

`What, if I meet with fatal accident during currency of Limited Payment Whole Life Plan?

• An additional amount equivalent to the basic insured amount not exceeding Rs 50,00,000 is payable along with the policy proceeds provided Accident rider has been included in the plan by payment of extra premium.

`What, if I meet with an accident and become Permanently Disabled ?’

• Further premium payable is waived.

• An additional amount equivalent to the basic insured amount not exceeding Rs 50,00,000 will be paid to you in monthly installments spread over next 10 years from the date of disablement, if you have Accident and Disability Rider included in your policy.

• All other benefits under the plan remain intact.

`Can I increase my life insurance coverage under Limited Payment Whole Life Plan?’

• No

Can I use This plan as Collateral Security for availing Housing Loan ? ‘

• Yes

Can I cover onset of some diseases in Limited Payment Whole Life Plan ?’

• No

‘What are the premium payment terms available under Limited Payment Whole Life Plan ?’

• 5 to 55 years with a condition that the upper age for premium ceasing shall not exceed 70.

`What are various premium payment options available to me under Limited Payment Whole Life Plan ?’

• Single (One-time payment), Yearly, Half-yearly, Quarterly and Monthly with 5% more.

`What is the effect of income-tax on the premium paid ?’

• Premium paid during currency of the policy along with other listed savings enjoys full exemption from income-tax upto Rs 1,00,000/- under section 80C of the Income-Tax Act 1961.

What is the effect of income-tax on the policy proceeds received on maturity/death ?’

• Policy proceeds received by way of maturity or death are free from income-tax under Section 10(10D) of the Income-Tax Act, whatever be the accumulated bonus.

`What is so special about Limited Payment Whole Life Plan ’?

• It is a Permanent Life Insurance Plan with very low premium and high returns. Bonus is calculated on the full insured amount as long as you are alive, at highest possible rate unlike other plans where it is limited to the policy term you have chosen.

`I am an NRI investor. Can I go for investment on Limited Payment Whole Life Plan’?

• Yes, you can invest through `Mail Order’.

Wednesday, January 23, 2008

बीमा सेवा के लिये

भारतीय जीवन बीमा निगम

वेबसाइट www.licindia.com
पालिसी सेवा 011-23329595

ओरियन्टल बीमा कम्पनी

वेबसाइट www.orientalinsurance.nic.in
शिकायत csd@orientalinsurance.co.in

चोलामण्डलम बीमा कम्पनी

वेबसाइट www.cholainsurance.com
हेल्पलाईन 1800-425-55-45

आई आर डी ए

वेबसाइट www.irdaindia.org


आर टी आई

वेबसाइट www.cic.gov.in

India Global Logistics Vision 2008 Visitor at Chola Stall


left to right Mr. R Kohli, Mr. Suryakant Sharma, Mr. Sunil Gupta & Mr. D P Agarwal (Chairman TCI)

left to right Mr. Rajesh Chetan, Mr. Sunil Gupta, Mr. Umberto De Pretto (Dy Sec IRU, Geneva), Mr. Suryakant Sharma & Mr. R Kohli

left to right Mr. Jagdish Mittal (Vice President, Agroha Medical Colleage), Mr. Sunil Gupta, Mr. K K Gupta (Chairman Best Roadways), Mr. Ramesh Agarwal (President, AITWA) & Mr. Suryakant Sharma

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क्या है सूचना का अधिकार, सूचना नहीं देना चाहती सरकार

नवभारत टाइम्स से साभार
[Thursday, August 16, 2007 01:59:29 am ]

दिलबर गोठी

नई दिल्ली : 2 साल पहले लागू सूचना के अधिकार का फायदा आम आदमी को अब भी पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है। हालांकि केंद्र सरकार के साथ-साथ दिल्ली सरकार भले ही दावा करे कि 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में लोगों को उनकी मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं लेकिन कई मामलों में केवल लीपापोती की जाती है। केंद्र सरकार सूचना का अधिकार देने के मामले में कितनी गंभीर है, इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि पिछले 1 साल में लोगों को इस अधिकार के बारे में सूचना देने में उसने 1 पैसा भी नहीं खर्च किया।

केंद्र सरकार के विज्ञापन डीएवीपी (विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय) द्वारा प्रसारित-प्रचारित किए जाते हैं। डीएवीपी ने 2006-07 के दौरान प्रिंट मीडिया को 109 करोड़ रुपये के विज्ञापन जारी किए। जाहिर है कि ये विज्ञापन विभिन्न नीतियों या घटनाओं को प्रचारित करने, लोगों को प्रोत्साहित करने या लोकहित में जारी किए जाते हैं। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी 100 करोड़ रुपये के विज्ञापन जारी किए गए। मगर, आप यह जानकर हैरान होंगे कि इनमें से कोई भी विज्ञापन ऐसा नहीं था जो लोगों को यह बताता हो कि वे सूचना के अधिकार के तहत कौन सी जानकारियां हासिल कर सकते हैं।

गौरतलब है कि पिछले 2 वर्षों में सूचना के अधिकार का इस्तेमाल कर कई लोगों ने सरकारी विभागों को हिलाकर रख दिया। आरटीआई ऐक्टिविस्ट देवाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि सरकार ने सूचना का अधिकार तो जनता को दे दिया लेकिन अभी वह इस मामले में गम्भीर नहीं है। ज्यादातर विभागों का यही प्रयास रहता है कि किसी न किसी तरह उन सवालों को टाला जाए जिसका जवाब वे नहीं देना चाहते। देवाशीष ने गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखा जिसमें कहा गया कि यह बताया जाए कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कुल कितनी शिकायतें आती हैं। मंत्रालय ने इसका कोई जवाब नहीं दिया और कहा कि हमारे पास इसका रेकॉर्ड नहीं है। संभव है कि दिल्ली पुलिस के पास यह रेकॉर्ड हो। इसलिए यह पत्र दिल्ली पुलिस के पास भेजा जा रहा है। दिल्ली पुलिस से जवाब आया कि उसके पास भी ऐसा कोई रेकॉर्ड नहीं। जाहिर है कि आम आदमी इस तरह का जवाब मिलने पर हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाता। लेकिन देवाशीष अब इस सवाल के जवाब की तलाश में केंद्रीय सूचना आयोग के पास जाने वाले हैं।

दरअसल यह जानकारी भी देवाशीष के 29 मार्च को एक सवाल के जवाब में ही मिल पाई है कि केंद्र ने लोगों को सूचना के अधिकार के बारे में कितनी जानकारी दी है। उन्होंने 8 फरवरी 2007 को पूछा था कि आखिर लोगों को इस ऐक्ट की जानकारी देने के लिए 2006-07 में कितना पैसा खर्च किया गया। इसके लिए कब-कब अभियान चले। यह भी पूछा गया कि क्या राज्यों के मुख्य सचिवों को भारत सरकार की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी किया गया है जिसमें जिला मैजिस्ट्रेटों की मार्फत ऐसे अभियान चलाने का निर्देश दिया गया हो। देवाशीष का कहना है कि सोए हुए विभागों को जगाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वालों के लिए यह अच्छा ऐक्ट है लेकिन सरकार अभी इसमें खुलकर साथ नहीं दे रही है।

एक अन्य एक्टिविस्ट सुबोध जैन भी मानते हैं कि यह ऐक्ट बहुत अच्छा है लेकिन जो विभाग अपने आपको फंसता महसूस करते हैं, वे जानकारी देने से बचते हैं। मसलन, दिल्ली पुलिस को ही देख लीजिए। दिल्ली पुलिस के उत्तरी जिले के अधिकारी तो मांगी गई जानकारी तुरंत दे देते हैं लेकिन उत्तर-पूर्वी और पश्चिमी जिले के अधिकारी इससे बचते हैं। उनका यह भी कहना है कि आमतौर पर लोगों को ऐक्ट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और न जानकारी देने के लिए कोई अभियान चलाया जाता है। लोगों को यह भी नहीं पता कि अगर उनकी जवाब नहीं आया तो क्या किया जाए। आमतौर पर मांगी गई सूचना पर जवाब 30 दिन में आना चाहिए और सरकार की तरफ से बताया जाना चाहिए कि अगर जवाब नहीं आया या वह जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो अमुक अधिकारी से सम्पर्क कर सकते हैं। लेकिन ऐसी कोई सूचना सरकार की तरफ से नहीं भेजी जाती। सुबोध इसका एक उदाहरण भी देते हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार से आम्बेडकर कॉलेज में प्रिंसिपल की नियुक्ति के बारे में जानकारी मांगी। वह जानना चाहते थे कि क्या इसमें कोई अनियमितता बरती गई है। जब उन्हें जवाब भेजा गया तो वह इससे संतुष्ट नहीं हुए। नियमानुसार रजिस्ट्रार को इस बारे में अपीलीय अधिकारी माना जाना चाहिए लेकिन उन्होंने असंतुष्ट होने की शिकायत कॉलेज में ही भेज दी। कॉलेज के अपीलीय अधिकारी प्रिंसिपल ही हैं। अब वह अपने खिलाफ शिकायत कैसे सुन सकते हैं। इसलिए एक लेक्चरर को अपीलीय अधिकारी बना दिया गया। कोई भी व्यक्ति अपने वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ शिकायत कैसे सुन सकता है और स्वाभाविक रूप से लेक्चरर ने पहले दिए गए जवाबों पर हस्ताक्षर कर वापस भेज दिए। अब यह सारा मामला केंद्रीय सूचना आयोग को भेजा गया है।

पल भर का नहीं है एजेंट से आपका रिश्ता

साभार - नवभारत टाइम्स 13 नवम्बर 2007

अच्छा इंश्योरेंस एजेंट जरूरत के वक्त हर समय आपकी मदद के लिए तैयार रहता है, लेकिन सवाल है कि ऐसा एजेंट ढूंढा कैसे जाए? हमने आपके इसी मुश्किल को आसान करने की कोशिश की है:

रेखा बख्शी एक प्राइवेट फर्म में एचआर मैनेजर हैं। वह अपनी इंश्योरेंस एजेंट से जब भी मिलती हैं, उनके चेहरे पर संतोष झलकता है। उनकी एजेंट रेखा को पॉलिसी के बारे में सटीक और विस्तृत जानकारी एकदम आसान तरीके से देती हैं। एजेंट की बात उन्हें फौरन समझ आ जाती है और वह पॉलिसी खरीद भी लेती हैं।

लेकिन हममे से ज्यादातर लोगों की तरह पॉलिसी लेने के बाद रेखा एजेंट के संपर्क में नहीं रहती हैं। नतीजा होता है कि जब उन्हें एजेंट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तो उसका अता-पता ही नहीं मिलता। रेखा बताती हैं, ‘मुझे हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का क्लेम हासिल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मेरी एक दोस्त ने बताया कि अगर हमारी इंश्योरेंस एजेंट होता, तो मुझे परेशान नहीं होना पड़ता। पर मेरे पास तो उसका अता-पता ही नहीं था। बाद में पता चला कि वह शादी करके मुंबई शिफ्ट हो गई।’

रेखा ने दूसरे एजेंट की तलाश शुरू की, लेकिन उनका केस लेने में किसी एजेंट ने दिलचस्पी नहीं दिखाई, क्योंकि इस पर उन्हें कम कमिशन मिलता। अंतत: रेखा की किसी दोस्त ने अपने फैमिली एजेंट को उनका मामला सौंपा और वह एजेंट रेखा के लिए काफी मददगार साबित हुआ।

पर्सनल रिकमन्डेशन

दरअसल, रेखा यह मानकर चलती थीं कि इंश्योरेंस एजेंट का कोई खास रोल नहीं है, क्योंकि एजेंट की गैरमौजूदगी में वह सीधे इंश्योरेंस कंपनी से मामला निपटा सकती हैं। जबकि सच यह है कि एजेंट कंपनी और क्लाइंट के बीच कड़ी का काम करता है और उसका रोल काफी अहम होता है। ऐसे में यह जरूरी है कि आपका एजेंट हर लिहाज से दुरुस्त हो। ऐसा एजेंट ढूंढना भी कम मुश्किल का काम नहीं है, क्योंकि आजकल ज्यादातर एजेंट कुछ साल काम करने के बाद किसी और फील्ड में करियर बनाने लगते हैं।

इसलिए जरूरी है कि इंश्योरेंस एजेंट को ढूंढने में पर्याप्त सावधानी बरती जाए। इसके लिए दोस्तों-रिश्तेदारों या परिचितों से संपर्क करना ठीक रहता है। वे अगर किसी अच्छे एजेंट की सेवाएं ले रहे हैं, तो उसके बारे में आपको बता सकते हैं। अगर वह एजेंट कम से कम पांच साल से आपके किसी परिचित या रिश्तेदार के साथ जुड़ा है, तो समझ लीजिए कि वह भरोसे का एजेंट साबित हो सकता है।

एक इंश्योरेंस अडवाइजर कहते हैं, ‘ज्यादातर लोग इंश्योरेंस एजेंट को सेल्सपर्सन मानने की भूल कर बैठते हैं। इसलिए वे एजेंट का फोन नंबर तक पास में रखने की जरूरत नहीं समझते, लेकिन सच यह है कि इंश्योरेंस से जुड़ी हर जरूरत पूरी करने में इंश्योरेंस एजेंट आपके काफी काम आता है। अगर कहीं मामला फंस जाए, तो ऐसे वक्त में अनुभवी एजेंट काफी काम आते हैं।’

फुल टाइम या पार्ट-टाइम?

आजकल कई लोग इंश्योरेंस एजेंट का काम पार्ट-टाइम जॉब के रूप में करते हैं, लेकिन आप ऐसे एजेंट को ही चुनिए, जो यह काम फुल टाइम प्रफेशन के रूप में करता हो। यह भी पता कर लीजिए कि आप जिसकी सेवा लेने जा रहे हैं, वह खुद एजेंट है या किसी दूसरे एजेंट की ओर से काम करता है। ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट वाले कई लोग अपनी पत्नी/पति के नाम पर एजेंसी ले लेते हैं और फिर अपने संपर्क के आधार पर पॉलिसी बेचने में लग जाते हैं। ऐसे लोगों के बारे में आप कुछ नहीं कह सकते कि कब वे यह कारोबार समेट लें। ऐसे में फुल टाइम, डायरेक्ट एजेंट पर भरोसा करना ही बेहतर है।

अवेलेबलिटी

आप जिसे अपना इंश्योरेंस एजेंट बनाने जा रहे हैं, उससे संपर्क करना कितना आसान रहेगा? इस सवाल का जवाब जान लेना भी जरूरी है। आप एजेंट से पूछिए कि क्या उनका कोई ऑफिस है या फिर क्लाइंट के लिए वह कहां और कैसे अवेलेबल हो सकते हैं? एक इंश्योरेंस एजेंट की राय में, ‘इस आसान से सवाल का जवाब पाकर आपको यह अंदाज हो जाएगा कि आपका होने वाला एजेंट अपनी जॉब को लेकर कितना गंभीर है।’ अगर एजेंट का कोई ऑफिस नहीं हो या उससे आसानी से कॉन्टैक्ट नहीं हो सकता हो, तो ऐसे एजेंट की सर्विस नहीं लेने में ही भलाई है।

अडवाइजर या सेल्समैन?

अब यह पता करने की बारी है कि आपका होने वाला एजेंट अपना काम कितना जानता है? एक इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी बताते हैं, ‘अगर एजेंट केवल स्पेसिफिक प्रॉडक्ट्स के बारे में बताता है, तो समझ लीजिए कि वह अपने काम में माहिर नहीं है। अच्छे प्रॉडक्ट्स बताने के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि उसे फाइनेंशल मामलों की पर्याप्त समझ हो। अगर उसने आपके लिए कोई गलत प्रॉडक्ट चुन लिया, तो आप नुकसान में रह सकते हैं।’

जानकार बताते हैं कि एजेंट को परखने के लिए उससे कुछ ऐसे सवाल भी पूछने चाहिए जिनसे पता चले कि आखिर वह इंश्योरेंस को किस रूप में लेता है। अगर वह केवल प्रॉडक्ट्स की ही बात करता है, तो आप जरूरत के वक्त उससे किसी नायाब सल्यूशन की उम्मीद नहीं कर सकते। इसका मतलब है कि उसकी दिलचस्पी केवल आपको पॉलिसी बेचने और कमिशन उगाहने तक सीमित है। ऐसे एजेंट टर्म प्लान जैसी पॉलिसी के बारे में आपको नहीं बताते हैं, क्योंकि इन पर अपेक्षाकृत कम कमिशन मिलता है।

गलत लाइसेंस पर मुआवजा नहीं मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दुर्घटना में शामिल वाहन के चालक के पास अगर समुचित लाइसेंस नहीं है तो बीमा कंपनी को मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

उदाहरण के लिए एक व्यक्ति के पास हल्के मोटर वाहन (एलएमवी) चलाने का लाइसेंस हो लेकिन अगर वह परिवहन या भारी मोटर वाहन (एचएमवी) चलाता है और दुर्घटना कर बैठता है तो ऐसे मामलों में बीमा कंपनी को चालक या वाहन स्वामी को मुआवजा देने की जरूरत नहीं है।

न्यायमूर्ति सीके ठक्कर और तरुण चटर्जी की पीठ ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति एचएमवी या परिवहन वाहन चला रहा है तो उसके पास हर हाल में उसे चलाने का वैध लाइसेंस होना चाहिए।

पीठ ने यह निर्देश न्यू इंडिया एश्यूरेंस कंपनी द्वारा दायर याचिकाओं पर दिया। कंपनी ने देश भर में विभिन्न उपभोक्ता फोरमों द्वारा परिवहन वाहन स्वामियों को दिए गए मुआवजे को चुनौती देते हुए कहा था कि चालकों के पास भारी वाहन चलाने के लिए वैध लाइसेंस नहीं होने के बावजूद उन्हें मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।

अब वाहन बीमा के अलग-अलग प्लान


मनोज जोशीThursday, January 03, 2008 04:50 [IST]
भोपाल. अगली बार जब आप अपने वाहन का बीमा कराने जाएं, तो पालिसी की शर्तो और उसकी दर के बारे में ठीक से तहकीकात कर लें। प्रीमियम जमा करते समय यह जरूर जान लें कि जो पालिसी आप ले रहे हैं, वह आपकी जरूरत को पूरा करती है या नहीं? वजह यह कि अब हर बीमा कंपनी वाहन बीमा के अलग-अलग प्लान दे सकेगी। वाहन के मॉडल व कलर के आधार पर भी प्रीमियम की राशि में अंतर आ सकता है।

यह व्यवस्था एक जनवरी से लागू हो गई है। बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) ने नए साल की शुरुआत के साथ ही साधारण बीमा में पालिसी की शर्तो में बदलाव की भी अनुमति दे दी है। प्राधिकरण पिछले साल डि टैरिफिंग लागू कर चुका है।

अब क्या होगा?: बीमा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार साधारण बीमा के क्षेत्र में काम करने वाली सभी 12 कंपनियां अलग-अलग पालिसी तैयार करेंगी और हर पालिसी का प्रीमियम अलग-अलग होगा। एक ही कंपनी एक ही प्रकार के वाहन के लिए अलग-अलग पालिसी भी दे सकेगी, जिसमें रिस्क कवर में अंतर होगा। न केवल वाहन के मॉडल और निर्माण के वर्ष, बल्कि उसके कलर के आधार पर भी प्रीमियम बदल सकता है।

बीमा कंपनियों के अधिकारी मानते हैं कि कुछ खास कंपनियों के खास मॉडल अधिक चोरी होते हैं, इनके प्रीमियम की राशि अधिक हो सकती है। इसके लिए कंपनियों को अपनी पालिसी प्राधिकरण से मंजूर करानी होगी। प्राधिकरण के अध्यक्ष सीएस राव द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार वाहन मालिकों ने जो पालिसी ले रखी हैं उसके प्रीमियम व शर्तो में पालिसी वैधता की तारीख तक कोई परिवर्तन नहीं होगा।

यदि उपभोक्ता चाहे, तो वह अपनी वर्तमान पालिसी को रद्द करके नई पालिसी ले सकता है। नई पालिसी का इंतजार: परिपत्र के अनुसार साधारण बीमा के व्यवसाय में शर्तो में परिवर्तन की यह व्यवस्था एक जनवरी से लागू हो गई है, लेकिन अब तक किसी भी कंपनी की नई पालिसी घोषित नहीं हो पाई है।

ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने व्यावसायिक वाहनों के बीमा पर प्रीमियम में छूट देना बंद कर दिया है। सरकारी बीमा कंपनियों के अधिकारी मानते हैं कि नई व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो पाएगी, जबकि निजी कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग पालिसी जल्द ही घोषित हो जाएंगी।

अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा असर
प्राधिकरण का यह आदेश साधारण बीमा के अन्य क्षेत्रों अग्नि दुर्घटना, मशीनरी आदि पर भी लागू होगा। इनमें भी कंपनियों की पालिसी और प्रीमियम अलग-अलग हो जाएंगे। लेकिन वाहनों के थर्ड पार्टी बीमा को इससे अलग रखा गया है। थर्ड पार्टी बीमा का टैरिफ पहले की तरह प्राधिकरण ही तय करेगा।

क्या कहते हैं बीमा कंपनियों के अधिकारी
>> उपभोक्ता अब अपनी जरूरत के अनुसार पालिसी ले सकेंगे, लेकिन अब उन्हें बीमा कराने से पहले अधिक सतर्क भी रहना होगा।
जनार्दन भार्गव, सीनियर ब्रांच मैनेजर, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी

>> नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को अधिक जागरूक रहना होगा। केवल कम टैरिफ के आधार पर बीमा पालिसी लेना नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।
प्रदीप शर्मा, डेवलपमेंट ऑफिसर, न्यू इंडिया एंश्योरेस कंपनी

>> हमारी नई पालिसी एक दो दिन में घोषित हो जाएगी।
सुबोध बघेल, सेल्स मैनेजर, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी

>> नई व्यवस्था लागू होने के बाद बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और केवल मजबूत आधार वाली कंपनी ही बाजार में टिक पाएगी। हमारी नई पालिसी आने में एक महीना लग सकता है।
विशाल हेमंत, रिलेशनशिप मैनेजर, इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस

Sunday, January 13, 2008

Friday, January 11, 2008

चोलामण्डलम को अन्तर्राष्ट्रीय परिवहन मित्र पुरस्कार


नई दिल्ली के होटल ग्राण्ड में भारत सरकार के परिवहन मंत्रालय, इन्टरनेशनल रोड़ ट्रांसपोर्ट यूनियन, जेनेवा तथा आल इंडिया ट्रान्सपोर्टस वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित इंडिया ग्लोबल लोजिस्टिक विजन 2008 के अवसर पर चोलामण्डलम एम एस जनरल इंश्योरेंश कम्पनी को सर्वश्रेष्ठ ग्राहक सेवा के लिए अन्तर्राष्ट्रीय परिवहन मित्र पुरस्कार प्रदान किया गया। चोलामण्डलम कम्पनी पिछले कई वर्षों से साक्षी फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से देश की कई बड़ी ट्रान्सपोर्ट कम्पनियों को अपनी बीमा सेवाएं प्रदान कर रही है। इस पुरस्कार को आई आर यू, जेनेवा के सचिव श्री उम्ब्रेटो डी प्रेटो द्वारा प्रदान किया गया तथा कम्पनी की ओर से डी जी एम, श्री सूर्यकान्त शर्मा और साक्षी फिनवेस्ट की ओर से श्री सुनील गुप्ता ने स्वीकार किया। 7-8 जनवरी को इस दो दिवसीय कान्फ्रेंस में लगभग दस देशों के तीन सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चोलामण्डलम कम्पनी द्वारा इस अवसर पर एक स्टाल भी लगाया गया था, इस स्टाल का उदघाटन श्री रमेश अग्रवाल, प्रधान एटवा ने किया तथा श्री डी पी अग्रवाल, चेयरमैन टी सी आई, श्री रोशन लाल गोरखपुरिया, निदेशक दिल्ली-आसाम रोड़लाईन्स, श्री उम्ब्रेटो डी प्रेटो, श्री जगदीश मित्तल, वाइस चेयरमैन अग्रोहा मेडीकल कालेज, श्री एच एल चोपड़ा, श्री प्रताप फौजदार, लाफ्टर चैम्पियन और श्री एस पी आर्या, चेयरमैन ई टी ओ की उपस्थिति ने कम्पनी का गौरव बढ़ाया।

Wednesday, January 2, 2008

How to save income taxes

“How to save taxes” is one of the biggest concern for any salaried person in India. You can see people asking others and tax consultants to give them advices on tax saving. So here are few advices and tips on tax saving in India.

Under section 80C, you can save tax by investing up to rupees 1,00,000 (One lakh) in various tax saving bonds and buying insurance. But there are more options available to you than just
section 80C, like.

• You can invest up to Rs. 70000 per annum in PPF, where the interest is tax-free. However, you could invest up to max Rs. 1 Lakh with additional PPF investment in the name of any other dependent family member like your wife or children and you can claim the deduction.

• You can buy a Mediclaim policy of premium 15000 per annum. This way you will have tax benefit as well as you will have good money incase of any health issues.

• Buy LIC or other life insurance policies that will give you some tax benefits. Maximum limit for LIC premiums are up to Rs. 1 Lakh. Premium paid in any year should not exceed 20% of the sum incurred. Also please note that the sum paid in excess of 20% will not be allowed for any deductions.

• You can show some of expenses as House rent, Even if you are not paying directly, but for the shake of saving some tax, you can show it as if you are staying in your family home but you pay rent to your father/mother.

• Invest in ULIP (unit linked policy). Minimum Limit - Rs. 15,000 with annual contribution of Rs. 1,000 and Maximum Limit - Rs. 2 lakh with annual contribution of Rs. 20,000. You will get exemption from wealth tax.

• You can buy some National Saving Certificates (NSC). It offers you flexibility like PPF. and is Available at any post office in a denomination as low as Rs. 100.

• Kisan Vikas Patra. here your money doubles in 8 years and seven months. Available at any post office in denominations of Rs. 100, Rs. 500, Rs. 1,000, Rs. 5,000 and Rs. 50,000.

• Get some home loans, if you plan to buy a home. You will get tax benefit against Interest paid on housing loan for self-occupied house property.
And above all when doing your tax planning, look at it comprehensively. Consider taking a good look at your insurance needs, your investment needs and whether or not you are servicing a home loan.